भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहाँ विश्व के अन्य देशों की अपेक्षा सर्वाधिक भू-भाग पर खेती की जाती है I इस देश की कुल भूमि का ४७.४८ प्रतिशत भू-भाग कृषि कार्यो के अंतर्गत आता है I भारत की लगभग ६० प्रतिशत जनसँख्या कृषि कार्यो में संलिप्त है । पिछले कई वर्षो से कृषि जोतों के औसत आकार में निरंतर गिरावट आ रही है । वर्ष 1995 – 96 में कृषि जोत का औसत आकार 1.41 हेक्टेयर था जो कि वर्ष 2010- 11 में घट कर 1.15 हेक्टेयर रह गया । भारतीय कृषि गणना (2011) के अनुसार देश में लगभग 80% किसान लघु व सीमान्त की श्रेणी में आते हैं I जबकि वर्तमान समय मे केवल 41% किसान ही खेती कर रहे है I यह किसान केरल, प. बंगाल, बिहार, पूर्वी उ.प्र में सबसे ज्यादा है ।
इसकी मुख्य वजह केन्द्र व राज्य सरकार की गलत नीतियों की वजह से किसानों को समय पर अच्छे गुणवत्ता पूर्ण बीज नहीं मिल पाते है I कृषि लागतो में अप्रत्याशित अधिक वृद्धि से छोटे किसानों की कमर टूट गई । ऊपर से सरकार एंव अधिकारियों की मिलीभगत से कम्पनी वाले खाद, उर्वरको, कीटनाशको में मिलावट कर किसानों को बेच रहे है ।
हम सिचाई की बात करे तो देश में कृषि योग्य भूमि का मात्र 40% भाग सिंचित हैं, शेष 60% कृषि भाग असिंचित एवं मानसून पर निर्भर हैं I अन्य देशों की तुलना में यह प्रतिशत बहुत कम है । मिश्र में १००%, जापान में ७०% तथा पाकिस्तान में ५० % कृषि क्षेत्र में सिंचाईं की सुविधा है । आज इतने वर्षों बाद भी हम पूरे देश मे सिंचाई की ब्यवस्था नही कर सके और विश्व गुरु बनने की बात करते है ।
आज हम तकनीकी युग की बात करे तो हम यह कह सकते है कि तकनीकी में भारतीय कृषि आज भी पीछे है मशीनीकरण का अभाव है । कुछ राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, महाराष्ट्र इनमे कृषि मशीनरी की फैक्ट्री स्थापित होने के कारण किसानो को लाभ मिल रहा है, अन्यथा अन्य राज्यों में अभाव है ।
अनाज भंडारण की भी समुचित व्यवस्था न होने के कारण अनाजों, फल व सब्जियों के अत्यधिक उत्पादन के बाद उचित भण्डारण की कमी की वजह ज्यादा नुकसान होता है । जिसका पूरा भार किसानों पर पड़ता है । भारत में लगभग ६३०० शीत भण्डारण है जिनकी क्षमता लगभग ३०.११ मिलियन टन है I लेकिन इसका ७५-८० % भाग केवल आलू भण्डारण में ही उपयोग में लिया जाता है ।
आज ज्यादातर किसान को कृषि कार्यो हेतु क़र्ज़ लेना पड़ता है I किसान क़र्ज़ का उपयोग कृषि कार्यो हेतु 73.61 % करता है जबकि अन्य खर्चे गृह निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक कार्यो के लिए करता है । राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय 2014 के अनुसार करीब 512% ग्रामीण परिवार क़र्ज़ में डूबे है I उसमे भी सबसे ज्यादा आंध्रप्रदेश में 92%, तेलंगाना में 89% व तमिलनाडू में 83% कर्जदार किसान है I
उपरोक्त सुविधाओ से वंचित रहने के बाद भी किसान अपने खून पसीने से खेत को जोत बो कर । खेती, पशुपालन, कुक्कट पालन, मत्स्य पालन, कृषि वानिकी आदि क्षेत्र में काम करता है, उसके बाद भी प्राकृतिक आपदाओं जैसे – बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, बेमौसमी वर्षात व कीट/रोगों का प्रकोप सहते हुए भी अनाज पैदा करता है । तब भी वो उपेक्षित है, मिटटी में जन्मा किसान, मिटटी में ही कर्म किया व जरूरत पड़ने पर वह अपने देश व धरती माँ के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से भी नही हिंचकिताता । इतिहास से लेकर आज वर्तमान तक उसने कई बलिदान दिए I जिसमें विश्नोई आन्दोलन- 1730, चिपको आन्दोलन- 1973, जंगल बचाओ आन्दोलन- 1980, अप्पिको आन्दोलन- 1983 आदि ऐसे अनगिनत आन्दोलन करके उसने देश को आइना दिखाया है ।

राकेश सिंह चौहान – प्रदेश अध्यक्ष 

मुझे बेहद प्रशन्नता है कि मैं देश के सबसे लोकप्रिय किसान संगठन “भारतीय किसान युनियन- लोकतांत्रिक” के साथ जुडा हूँ । सगंठन के प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय श्री राकेश सिहं चौहान जो कि एक सच्चे और ईमानदार किसानो के सेवक है उनकी नीतियों से प्रेरित होकर मैंने पूरी निष्ठा के साथ स्वंय को आजीवन किसान हित के लिए समर्पित कर दिया । सगंठन मे समस्त पदाधिकारी गण सगंठन के द्वारा बनाऐ गये नियमो का पूरी ईमानदारी से पालन करते है एंव पीड़ित शोषित किसानो के हर मुसीबत के समय कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार रहते है । आज वर्तमान समय मे प्रदेश/देश के किसानो के साथ अन्याय, चरम सीमा पर पहुंच गया । परन्तु कोई भी राजनेता एंव राजनैतिक दल इस बात को कहने के लिए तैयार नही है । भारतीय किसान यूनियन-लोकतांत्रिक ही एक ऐसा मंच है जो पूरी ताकत के साथ कहने और करने की हिम्मत रखता है । अब तक राज्य एंव केन्द्र सरकारों द्वारा किसान हित में जितने वादे किऐ गए, उनमे से एक भी वादा पूरा पड़ता दिखाई नही पड़ रहा । कोई भी राजनैतिक दल इन बिन्दुओ को लेकर आन्दोलन नही कर रहा । लेकिन यह सगंठन अपने क्षेत्र से लगाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक उस बात को कहकर किसानो का हक दिलाने के लिऐ हर समय प्रयासरत रहता है, थाना तहसील ब्लाक जहां पर किसान हर रोज हर दिन लूटे जाते है उन जगहो पर सबसे ज्यादा सगंठन धरना प्रदर्सन करके किसानो को जागरूक कर इस अन्याय से बचाने का काम करता है। इस सगंठन का मुख्य उदेश्य, कृषि प्रधान देश भारत मे किसानो का राज स्थापित करना, जिससे किसान को अन्याय,अत्याचार से छुटकारा मिले, और किसान को पूर्ण सम्मान व उनका अधिकार मिले, इस सोचं के साथ कि एक दिन हमारा भारत फिर से सोने की चिड़िया कहलाए ।
मैं उत्तर प्रदेश के किसानो का हृदय से आभार ब्यक्त करता हूँ कि जो भरोषा एंव ताकत उन्होंने संगठन को दिया है आज उसी की वजह संगठन बड़े बड़े आंदोलन करके किसानों को उनका अधिकार दिला पाती है ।

प्रदीप शुक्ला “श्यामू”
कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष

आजादी के 71 साल बाद भी हमारे देश एंव प्रदेश में गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी कम नही हो पा रही है इसके लिए सरकारी नीति के अलावा हम आप भी जिम्मेदार है । हममे आज भी जागरूकता का अभाव है , आज भी हम जाति- बिरादरी, ऊंच – नीच, छोटा – बड़ा के चक्कर में फँसे हुए है । लोग सत्यता को जानते हुए भी अपने जीवन को कभी मृत्यु न आने की कल्पना में खुश होकर इतने ब्यस्त हो जाते है कि उनके आस पास रह रहे पड़ोसियों से भी मिलने का समय नही रहता है , वह दिन प्रतिदिन अमीर, और अमीर बनना चाहते है । अकस्मात दुर्घटना बस अपने प्रियजन की चिता से उठती हुई लपटो को देखकर कुछ समय के लिए जीवन की छंरभंगुरता में खो जाते है । परन्तु यह एहसास भी नही होता कि यही लपटे एक दिन हमें भी अपने आगोश में समेट लेगी, एक एक साँस हमारे जीवन को छोटा करती चली जाती है और एक दिन मृत्यु हमारी चैखट पर आकर खड़ी हो जाती है । यही अंतिम सत्य है ।
अब भी वक्त है जागो और जगाओ , माथे पर खींच आई दुर्भाग्य की लकीरों को पोंछकर सौभाग्य की इबादत लिखने वाले हाथ इतिहास के पन्नो में अपना नाम दर्ज करा जाते है । तो आइए हम सब एकजुट हो और कन्धे से कन्धा मिलाकर अपनी बुलन्द आवाज और एकता का एहसास कराने के लिए भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक से जुड़े, जो देश के समस्त किसानों एंव खेतिहर मजदूरों को जागरूक करने एंव उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने व उनकी समस्याओं के स्थाई निवारण के लिए समेकित हुआ है ।

राहुल सिंह (सोशल एक्टिविष्ट)
प्रदेश महासचिव