किसानों एंव खेतिहर मजदूरो की सेवा में समर्पित

भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक राष्ट्रभाव से प्रेरित किसानों एंव खेतिहर मजदूरों का ऐसा समूह है जो भारत देश के समस्त किसानों को जागरूक करने एंव सामाजिक सरोकारों से सम्बंधित विषयों पर ब्यापक चर्चा, गोष्ठी एंव किसान पंचायत कर उनके समाधान हेतु समेकित हुआ है । भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक की विचारधारा ऐसे लोगो को एक मंच प्रदान करना है जो किसान एंव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर अपने ज्ञान एंव इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना चाहते है , तथा कृषि प्रधान युक्त नए भारत के निर्माण में अपना नाम दर्ज कराना चाहते है ।

प्रमुख उद्देश्य :-

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आज के इस भौतिकतावादी युग मे किसानों को लाचार, बेचारा, एंव अधिकार विहीन बना दिया गया है किसान सशक्तिकरण के लिए सरकार को प्रभावशाली कदम उठाने की जरूरत है । इसके लिए समाज के हर वर्ग के लोगो को आगे आना चाहिए तभी सरकार की जबाबदेही तय हो सकेगी । तब एक किसान बेचारा न रहकर कृषि प्रधान देश के निर्माण में एक मजबूत सहारा बन सकेगा । इसके लिए किसान को सिर्फ अपने उत्पाद का सही मूल्य मिल जाता है तो वह स्वंय सक्षम बन सकता है । केन्द्र सरकार ने ई- राष्ट्रीय कृषि बाजार की शुरुआत तो की है, परन्तु बिचौलियों एंव साहूकारों के जाल से आज भी मुक्ति नही मिल पाई है । किसान अपने उत्पाद का सही कीमत पर विक्रय कर उसका लाभ पा सके उसके लिए सरकार को निम्न दिशा में कार्य करने की जरूरत है ।
1- स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार कृषि उत्पादन का स्थायी मूल्य निर्धारण ।
2- किसानों के हितों का संरक्षण ।
3- उपभोक्ता के लाभों के संरक्षण ।
4- कृषि एंव उद्योग की परस्पर निर्भरता ।
5- आर्थिक विकास एंव समृद्धि के साथ कृषि को जोड़ा जाय ।
6- कृषि एंव उद्योग में टकराव की स्थिति न बने ।
7- कृषि क्षेत्र में भी कार्पोरेट की ब्यवस्था ।
उपरोक्त बिन्दुओ के साथ साथ किसान का समन्वित विकास भी होना चाहिए जिससे किसानों की सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजनाए बने । किसान को सिर्फ उत्पाद बढ़ाने की जानकारी न दी जाय बल्कि घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण की तकनीकी एंव मूल्य सम्वर्धन कृषि विविधीकरण, कृषि वानिकी व कृषि क्षेत्र की विशेष तकनीको में सुधार कर के स्वावलंबी बनाया जाय ।

किसान आत्महत्या क्यों कर रहा

आज किसान आत्महत्या कर रहा है उसका मुख्य कारण खेती का आर्थिक दृष्टि से नुकसानदायक होना, तथा किसानों द्वारा अपने परिवार का जीविकोपार्जन सुचारु रुप से न कर पाना, जिसका एक वजह यह भी है कि मानसून समय पर न आना जिसके कारण फसलें बर्बाद हो जाती है, ओलावृष्टि के कारण भी फसल नष्ट हो जाती है, सूखा पड़ना, उपज का लाभकारी मूल्य न मिल पाना, कर्ज का अत्यधिक बोझ, बैंकों, साहूकारों, बैंकों आदि के चक्कर मे फँसकर किसान आत्महत्या करने पर विवस हो जाता है । जिसकी वजह से भारत मे सन 1990 के बाद से किसानो की आत्महत्या करने जैसी स्थिति बनी । सुरुवात के दौर में हर वर्ष 10 हजार से अधिक किसानो के द्वारा आत्महत्या की रिपोर्ट दर्ज है, वही 1997 से 2006 के बीच 166304 किसानों ने आत्महत्या की । राष्ट्रीय अपराध अपराध लेखा कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार सन 2008 में 16196 किसान एंव सन 2009 में 17368 किसानों की आत्महत्या करने की रिपोर्ट दर्ज है ।
राष्ट्रीय अपराध लेखा कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार 1995 से 2011 तक के बीच 17 वर्षो में 7 लाख 50 हजार 860 किसानों ने आत्महत्या की है ।
उपरोक्त आंकड़े सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है । जबकि पूरे देश मे प्रतिदिन न जाने कितने किसान ऐसी ही अवस्था मे अपने प्राणों की आहुति देते है वो सब आंकड़े सरकार के पास नही पहुँच पाते । यह चिन्ता का विषय है कि आज भी आधुनिक भारत मे किसानों को आत्महत्या करने पर विवस होना पड़ रहा है ।

आज किसान बेचारा क्यों :-

आजादी के पूर्व एंव आजादी के बाद भारत भी किसानो की दशा दयनीय बनी हुई है । राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (2014) के सर्वेक्षण के अनुसार किसानों की औसत आय 6426 रुपये प्रति माह है । इस आय में 3078 रुपए कृषि से 2069 रुपए मजदूरी / पेंसन, 765 रुपए पशुधन व 515 रुपए गैर कृषि कार्यो से अर्जित करता है । आज वर्तमान परिवेश में भारतीय किसानों की स्थिति अच्छी नही है उसे सामाजिक कार्यो जैसे बेटी का विवाह, म्रत्यु भोज/ तेरहवीं इत्यादि कार्यो को सम्पन्न करने हेतु कर्ज का भागीदार बनना पड़ता है । एक कटु सत्य यह भी है कि आज पूरे देश मे डिजिटल इंडिया एंव स्मार्ट सिटी बनने की बात हो रही है । वहीं देश का 36% किसान झोपड़ी/ कच्चे मकान , एंव 44% कच्चे पक्के / मिश्रित मकानों में रहने को मजबूर है । आज अधुनिकता के विकास की होड़ में किसान अपने आपको लाचार व ठगा हुआ महशूस कर रहा है

किसान के अधिकार की बात

भारत मे लगभग 80% किसान लघु एंव सीमांत की श्रेणी में आते है इसलिए केन्द्र एंव राज्य सरकार को चाहिए कि किसानों के उत्थान के लिए जो भी योजना बनाए उसे लघु एवं सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए । जब तक आर्थिक विकास एंव समृद्धि के साथ कृषि को नही जोड़ा जाएगा तब तक किसान की आय दोगुनी हो ही नही सकती, दोगुनी आय करने के लिए निम्नलिखित सुझावों को नियति एंव नीति बनाकर लागू करने की जरूरत है । जैसे –
– किसानों की आमदनी बढ़ाई जानी चाहिए उन्हें कर्ज नही बल्कि नियमित आय चाहिए ।
– किसान को कृषक के साथ साथ कृषि उद्यमी बनाना होगा ।
– लघु एंव सीमांत किसानों के लिए वेतन आयोग का गठन किया जाना चाहिए ।
– सार्वजनिक वितरण प्रणाली व न्यूनतम समर्थन मूल्य को सुधारने की जरूरत है ।
– पंचायत स्तर पर एक कृषि क्लिनिक या कृषि अस्पताल खोलने की ब्यवस्था होनी चाहिए ।
– भारतीय कृषि प्रशासनिक सेवा का गठन किया जाना चाहिए जो जिला कृषि ब्यवस्था, विपरण, कृषि आपदा, कृषि ब्यापार, कृषि नीतियों का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन कर सके ।
– भारत मे कृषि शिक्षा एंव अनुसन्धान पर और जोर दिया जाय, कृषि शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में 10 वीं तक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाय ।
– प्रत्येक जनपद में एक कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना किया जाना चाहिए ।